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जनवरी 26, 2011

मेरे इस रेगिस्तान.........


 मेरे इस रेगिस्तान मन में
 बूँद प्यार का गर टपक जाए
  रेत गीली हो जाय
   दिल का दामन भर जाय

    जन्मों से प्यासे इस मन को
     प्यार का जो सौगात मिला
      मन पंछी बन उड़ जाए
       रहे न जीवन से गिला

        जाने क्यों मन भटका जाय
         ढूंढे किसे ये मन बंजारा
          है आवारा बादल की तलाश
           पाकर मन कहे 'मै हारा'

             इतना प्यार उड़ेलूँ उसका ..
              आवारापन संभल जाए
               वो बूँद बन जाए बादल का
                और इस सूखे मन में टपक जाए

8 टिप्‍पणियां:

  1. इतना प्यार उड़ेलूँ उसका ..
    आवारापन संभल जाए
    वो बूँद बन जाए बादल का
    और इस सूखे मन में टपक जाए..

    बहुत भावपूर्ण प्रेम गीत..

    उत्तर देंहटाएं
  2. गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर भावपुर्ण गीत
    बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. जाने क्यों मन भटका जाय
    ढूंढे किसे ये मन बंजारा
    है आवारा बादल की तलाश
    पाकर मन कहे 'मै हारा'जीवन मे और कुछ मानो य न मानो मगर हार मत मानो। अच्छी रचना। गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कोमल भावों से सजी ..
    ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
    आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!
    गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ... जय हिंद

    उत्तर देंहटाएं
  6. कोमल भावों से सजी ..
    ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
    आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!

    उत्तर देंहटाएं
  7. इतना प्यार उड़ेलूँ उसका ..
    आवारापन संभल जाए
    वो बूँद बन जाए बादल का
    और इस सूखे मन में टपक जाए


    bahut sunder

    उत्तर देंहटाएं
  8. जन्मों से प्यासे इस मन को
    प्यार का जो सौगात मिला
    मन पंछी बन उड़ जाए
    रहे न जीवन से गिला
    बहुत सुंदर लेकिन मार्मिक भाव की अभिव्यक्ति ...शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं

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