ये जो आंधी है चली ,सड़क -सड़क गली गली चुनाव पर्व है जो ये ,चेहरे लगे भली भली कर्म उनके जांच लो, मंसूबे क्या है जान लो सोचे हित जो जन की उसको वोट देना ठान लो लालच में अब न आयेगे ,बटन उसीपर दबायेंगे सुराज लाये पांच बरस,अब न हम पछतायेंगे डगर है ये बहुत कठिन ,चुनाव करना भी कठिन चुने जिसे हम अबकी बार,होवे न उससे शर्मसार आओ मिलकर वोट दे , लोकतंत्र विजय करे निशाँ अंगूठे की अपने देशहित में भेंट दे |
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फ़रवरी 26, 2012
चुनाव पर्व
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