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नवंबर 09, 2017

हद है

अश्कों को आँखों का ठौर पसन्द नहीं
उसे पूरी दुनिया से है वास्ता, हद है

कर भी लूँ नींदों से वाबस्ता
ख़्वाब बन जाता है हरजाई हद है
 
रिंदो साक़ी ने झूम के पिलाया जो
घूँट पानी का न उतरा हद है


कर ली खूब मेहमाननवाज़ी भी हमने
हुए फिर भी बदनाम हद है

दो दिन ज़िन्दगी के चांदनी के चार दिन
बाकी ज़िन्दगी है सियापा हद है

ताश के पत्ते मानिंद बिखर जाता है घर
जो न सम्भाला तिनका भी हद है

कर ली थी मैंने इश्क़ से तौबा
उफ़्फ़ तेरी ये आंखें हद है

ये दिल भी बड़ा कमज़र्फ निकला
जान के भी इश्क़ ए दस्तूर हद है

सितंबर 04, 2017

मशहूर हो गए


ज़िन्दगी से कुछ इतने क़रीब हुए
कि आईने से भी  हम अजनबी हुए

रोशनी जो आँखों की नजर थी
दिखाया नहीं कुछ जो बत्ती गुल हुए

आ पँहुचे है ऐसी जहाँ में हम
ना ख़ुशी से ख़ुश औ' ना ग़म से ग़म

सभी रास्तें  मिल जाते है जहाँ
उस जगह से रास्तों सा अलग हुए

अच्छे-बुरे,सही-गलत पहचान न सके
मिले सबसे इस कदर कि मशहूर हो गए 

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