मई 28, 2011

कदम क्यों रुक

कदम क्यों रुक से से गए
तेरे दामन में आकर
साँसें क्यों थम सी गयी
तुम्हे याद-याद कर


नींद भी क्यों न आये
मुझे आधी रात तलक
उनींदी रातें गुजारूं मै
इंतज़ार में कब तक


मेरी हस्ती मिट जायेगी
तुम्हे याद करते
बेजान सी ज़िन्दगी है मेरी
सपनो में तुम्हे देखते


यूं ही समय कट जायेगी
यादों के पन्ने पलटते
अक्स धुंधली पड़ जायेगी
रिश्तों के सिलवटों को झटकते


बस कहा दो इतना कि
तुम अब भी हो मेरे
मन के दरख्तों में बसे है
मेरे ही चेहरे


तुम्हे छूकर जाती है
जो हवा मुझसे होकर
उन हवाओं में अब भी
तुम ढूँढ़ते हो अक्स मेरा  

समर्थक

लिखिए अपनी भाषा में

qr code

qrcode

ब्लॉग आर्काइव

copyscape

Protected by Copyscape Online Plagiarism Finder

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...