अगस्त 24, 2011

घोर घनघटा............

डूबा दिन ढल गयी शाम ,रोक न पाऊँ मैं
आकाश सज गए तारों से ,कदम बढाऊँ मै

Animation Image 398564
घोर घनघटा नहीं चांदनी , न रोशनी तारों की
उतावला मन बिखरा पल , उठे मन में विचारें भी

न हो ये शाम रात बदनाम , दिल बरबस तनहा
मन बेचैन...सगरी रैन कब होवे सुबहा

जाने क्या दिन का राज़ , उत्फुल्ल है मन
रोशन है जग सारा ,हुआ मन रोशन



समर्थक

लिखिए अपनी भाषा में

qr code

qrcode

ब्लॉग आर्काइव

copyscape

Protected by Copyscape Online Plagiarism Finder

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...