फ़रवरी 21, 2011

आँखों से झांकते...........

             (1)
आँखों से झांकते हुए तुम दिल में उतर गए
हया का पर्दा है जो तुम्हे मुझसे है अलग करता
             (2)
तुम्हे पाने की आरज़ू ने मुझे दीवाना बना दिया
तुम्हारे प्यार को पाना मैंने मकसद बना लिया
तुम्हे न पाने से जो सूरत-ए-हाल होगा सनम
ये सोचना भी दिल गवारा नही करता

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