मई 07, 2010

मन रीता

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मैंने तुझे याद किया तुझे न पाया
मेरे मन के अंत:स्थल में रिक्तता छाया
मन क्या रीता ही रहा जाएगा संपूर्ण जीवन
विश्वास है लौट कर आओगी तोड़कर सब बंधन
लौटोगी अवश्य तुम विश्वास है मुझे
कशिश मेरे प्यार की खींच लाएगी तुझे
आना ही है जब मेरे जीवन में तो क्यों है विलम्ब
तेरे कदमो की आहट सुन समय गया है थम
मरे रीता मन में एक बार और छा जाओ
बिताये हुए पलों को स्मरणीय बना दो
मेरे हृदय की रिक्तता को संपूर्ण भर दो
इस अनुनय को पर दुर्बलता न समझो
गर आओ जीवन मे फूलों से है स्वागत
बिताएंगे जीवन भर साथ "हरी ॐ तत्सत "

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