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अगस्त 26, 2011

सुन लो ..........


सुन लो नभ क्या कहता है
धरती में पडा सन्नाटा  है,
असंख्य तारों की बातें
कोई नहीं सुन पाता है


व्यथा है इनकी भी- सुध  लो
आती रोशनाई को धर लो
हो सकता है धरती  की कोई
व्यथा है कहती  है-सुन लो


ऊपर  गगन है नीचे जन
भ्रष्ट तंत्र  -भूखे  जन-गण
नेताओं की लूट कथा को
बांच  रही नभ कर-कर वर्णन


 जन-जन अब  होकर जागृत
करने  न देंगे ...कुकृत्य
बरसेगा  घनघोर घटा
भर भर लेकर  बूँद अमृत






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