समर्थक

अगस्त 24, 2011

घोर घनघटा............

डूबा दिन ढल गयी शाम ,रोक न पाऊँ मैं
आकाश सज गए तारों से ,कदम बढाऊँ मै

Animation Image 398564
घोर घनघटा नहीं चांदनी , न रोशनी तारों की
उतावला मन बिखरा पल , उठे मन में विचारें भी

न हो ये शाम रात बदनाम , दिल बरबस तनहा
मन बेचैन...सगरी रैन कब होवे सुबहा

जाने क्या दिन का राज़ , उत्फुल्ल है मन
रोशन है जग सारा ,हुआ मन रोशन



12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना , सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल 25/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. खूबसूरत मनोभावों की उतनी ही खूबसूरत प्रस्तुति ! बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर भावों से लिखी शानदार अभिब्यक्ति /बधाई आपको /



    please visit my blog .thanks.
    www.prernaargal.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खुबसूरत प्रस्तुति ....

    उत्तर देंहटाएं

ब्लॉग आर्काइव

widgets.amung.us

flagcounter

free counters

FEEDJIT Live Traffic Feed