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अगस्त 05, 2012

रे बरगद ....!!!



उलझी निगाहें तेरी उलझी जटाओं में ,
रे बरगद तन के तू खडा कैसे राहों में -
तेरे  पनाह में पनपे न कोई पौधा रे ,
फिर भी तुझे पूजे जग के सब बन्दे रे !!


शाख तेरी मजबूत बाहों की सलामी दे 
फल न फूल केवल पत्तों की छाया ही दे 
माना  तेरी जटाओं में है औषध के गुण 
पूजा तेरी की जाती है गाकर कई धुन 


साक्षी है तू ही सावित्री पूजा की रे -
चिड़ियों गिलहरियों का तुझमे बसेरा है रे 
फिर भी न जाने क्यों तू ये न चाहे रे 
तेरी पनाह में पनपे कोई पौधा रे !!!

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