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अगस्त 15, 2012

बुझी हुई मशाल जला दो
















बुझी हुई मशाल जला दो 
आग की ज्वाला बढ़ा दो 
देश राग गुनगुनाकर 
एक नवीन ज्योत जला दो 

राग दीपक फिर है सुनना 
ताप में फिर से है जलना 
प्रलय आंधी भेद कर फिर-
से है तम को जगमगाना 

नेह-दीपक तुम गिराओ 
मन शहीदी को जगाओ 
ललकार जागा हर तरफ से 
विद्रोह पताका ...फहराओ 

भ्रष्टता का होवे अंत 
दंड मिलना है तुरंत 
हर लौ में विप्लव की हुंकार 
गृहस्थ हो या हो वो संत 

एक चिंगारी ही है काफी 
बढ़ेंगे हम मनुज जाति 
निर्भय-निर्भीक-निडर है हम 
आन्दोलन करना है बाकी 

जीतेंगे हम हर तरफ से 
कुरीतियों से-हैवानियत से 
लक्ष्य है सुराज लाना 
क्रांति-पथ या धर्मं-पथ से 

जाने न देंगे हम ये बाजी 
मरने को  हम सब है राजी 
केसरी चन्दन का टीका-
कफ़न सर पे हमने बाँधी 


19 टिप्‍पणियां:

  1. मन में आशा, विश्वास और जोश जगाती बेहद
    सुन्दर और सार्थक रचना...
    बदलेगा सब इसी आशा और विश्वास के साथ
    स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये..
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत रचना………………स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  3. ज़बरदस्त लिखा है...

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जय हिंद!

    उत्तर देंहटाएं
  4. Very beautifully written poem and the video on top is simply wonderful. Loved the music in it.

    उत्तर देंहटाएं
  5. वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
    अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,,
    RECENT POST...: शहीदों की याद में,,

    उत्तर देंहटाएं

  6. जाने न देंगे हम ये बाजी
    मरने को हम सब है राजी
    केसरी चन्दन का टीका-
    कफ़न सर पे हमने बाँधी

    Sahi Kaha aapne,
    Jai HInd.

    उत्तर देंहटाएं
  7. जीतेंगे हम हर तरफ से
    कुरीतियों से-हैवानियत से


    लक्ष्य कायम रहे ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ओजपूर्ण कविता...स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत बढ़िया.....जोश से भरी....
    सुन्दर!!!!

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी इस बेहतरीन रचना शनिवार 18/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  11. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो
    कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है, स्वरों में कोमल निशाद और
    बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें अंत में
    पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.
    ..

    हमारी फिल्म का संगीत वेद
    नायेर ने दिया है.

    .. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों
    कि चहचाहट से मिलती है..
    .
    Take a look at my web-site :: फिल्म

    उत्तर देंहटाएं
  12. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित
    है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है, स्वरों में कोमल निशाद
    और बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने
    इसमें अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे
    इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.
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