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फ़रवरी 26, 2012

चुनाव पर्व



ये जो आंधी है चली ,सड़क -सड़क गली गली 
चुनाव पर्व है जो ये ,चेहरे  लगे भली भली 


कर्म उनके जांच लो, मंसूबे क्या है जान लो 
सोचे हित जो जन की उसको वोट देना ठान लो 


लालच में अब न आयेगे ,बटन उसीपर  दबायेंगे 
सुराज लाये पांच बरस,अब न हम पछतायेंगे 


डगर है ये बहुत कठिन ,चुनाव करना भी कठिन 
चुने जिसे हम अबकी बार,होवे न उससे शर्मसार 


आओ मिलकर वोट दे , लोकतंत्र विजय करे 
निशाँ अंगूठे की अपने देशहित में भेंट दे 


9 टिप्‍पणियां:

  1. कर्म उनके जांच लो, मंसूबे क्या है जान लो
    सोचे हित जो जन की उसको वोट देना ठान लो

    सही संदेश।
    मौसम के अनुकूल..!

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक अच्छी चेतावनी ... वोटरों के लिए /
    mere bhi blog par aaye

    उत्तर देंहटाएं
  3. उम्मीद है अक्ल से काम लेंगे....

    अच्छी चेतावनी..

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं

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