समर्थक

दिसंबर 24, 2011

चाँद फिर....


चाँद फिर चुपके से निकला 
धीरे-धीरे बढती आभा 
फूल मधुवन में फैले खुशबू 
गीत कोई गए आ ssss

मन वीणा के तार बज उठे 
स्वर में  है जादू लहराया 
पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण 
चहूँ ओर से क्या स्वर आया 

दो हृदयों का मिलन देखकर 
प्राण-श्वास का प्रणय देखकर 
अंतर्मन में आस जग उठी 
चाँद डूबा कब सूरज आया 
                
चिड़ियों की कलरव गूँज उठी 
कलियाँ भी फिर से महक उठी 
उषा के मृदु किरणों के संग 
नभ पर सूरज फिर उग आया 


ब्लॉग आर्काइव

widgets.amung.us

flagcounter

free counters

FEEDJIT Live Traffic Feed