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दिसंबर 14, 2011

मुद्दत हुए....



 मुद्दत हुए हाल-ए-दिल 
तुमसे बयान किये हुए 
फुर्सत में,तन्हाई में 
 लम्हें     ढूँढ़ते     हुए 


इश्क-सागर की गहराई 
नापने चली थी मैं 
पर तुम मिले -
गीली रेत पर कदमों के 
निशाँ ढूँढ़ते हुए 


आईने में अपना ही चेहरा 
पराया सा नज़र आया 
चंद भींगे लम्हों को मैंने 
तकिये में है दबाया 


मुद्दत हुई चाँद से 
चंद बातें किये हुए 
 तारों की सरजमीं पे 
रौशनी से नहाते हुए 





17 टिप्‍पणियां:

  1. ''इश्क-सागर की गहराई
    नापने चली थी मैं
    पर तुम मिले -
    गीली रेत पर कदमों के
    निशाँ ढूँढ़ते हुए''

    बेहतरीन लाईनें... गजब के जज्‍बात।

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  2. मुद्दत हुई चाँद से
    चंद बातें किये हुए
    तारों की सरजमीं पे
    रौशनी से नहाते हुए...bhaut khubsurat abhivaykti.........

    उत्तर देंहटाएं
  3. आईने में अपना ही चेहरा
    पराया सा नज़र आया
    चंद भींगे लम्हों को मैंने
    तकिये में है दबाया
    हृदयस्पर्शी एहसास!

    उत्तर देंहटाएं
  4. मुद्दत हुई चाँद से
    चंद बातें किये हुए
    तारों की सरजमीं पे
    रौशनी से नहाते हुए

    jismei dekho chaand
    usee se dil lagaa liyaa karo

    उत्तर देंहटाएं
  5. फुर्सत के दो क्षण मिले, लो मन को बहलाय |

    घूमें चर्चा मंच पर, रविकर रहा बुलाय ||

    शुक्रवारीय चर्चा-मंच

    charchamanch.blogspot.com

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  6. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-729:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  7. बेहतरीन सोच. खूबसूरत कविता.

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  8. बेहद खूबसूरत नज़्म दिल मे उतर गयी।

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  9. बहुत सुंदर प्यारी रचना,....

    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

    नेता,चोर,और तनखैया, सियासती भगवांन हो गए
    अमरशहीद मातृभूमि के, गुमनामी में आज खो गए,
    भूल हुई शासन दे डाला, सरे आम दु:शाशन को
    हर चौराहा चीर हरन है, व्याकुल जनता राशन को,

    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  10. बहुत खूब


    ना ये ज़मी तेरी ...ना ये आसमान तेरा ....
    फिर भी क्यूँ तू तेरी तालाश अब भी अधूरी है...anu

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