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दिसंबर 08, 2011

ईमान क्यों है गड़बड़ाया


ईमान क्यों है गड़बड़ाया
 तेरी सूरत देखकर
किताब में रक्खे  फूल भी
ताजगी दे गयी महककर


दिल-ए-दास्ताँ जो कभी
बंद थी किताब में
शोखियाँ और बांकपन सब
छुप गया था नकाब में


फिर क्यों  ले जाए हमें
बहारों के शबाब में
सुर फिर से क्यों बजे
 सुरीली रबाब में


क्यों फिर से ज़िन्दगी के
कैनवस में रंग दिख गये 
क्यों फिर से सूखे  गुलाब
किताबों के बीच  महक गये 


ईमान फिर से गड़बड़ाया
तेरी सूरत देखकर
फिर से क्यों सूखे फूल
ताजगी दे गयी महककर





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