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अक्तूबर 21, 2011

नदी के पार

नदी के पार कोई गाता गीत 
उस स्वर में बसा है मन का मीत 
नदी की लहरों खेतों से उठकर 
आती ध्वनि मन लेता जीत 

होगा इस पार जो लेगा सुन 
इस देहाती गानों का उधेड़-बुन 
इन एकाकी गानों को सुनकर 
मरकर भी जी लेगा पुन-पुन 

भानु-चन्द्र का है आलिंगन 
प्रकाश से भरा है लालिमांगन 
इन गीतों ने छेड़ा है फिर से 
राग-अनुराग का आलापन 

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