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जुलाई 21, 2011

तेरा आना......


                  
वक्त बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है
यादों के सागर में डूबना अच्छा लगता है 
चुटकियों में दिन गुज़रकर शाम जो हो जाती है 
तेरी यादों में तारे गिनना भी अच्छा लगता है ||

ये यादें भी बेमुरव्वत बेवफा होती है 
कभी आती है तो कभी गुम हो जाती है 
नफरत है तेरी यादों से जो रुला जाए बार बार 
पर मरहम भी तो दिल को तेरी याद ही लगाती है ||

वजह यही है तेरी यादों को सजोने का 
एक बेवफा  के प्यार को ज़ुदा न करने का 
रौशनी तले अँधेरा है ये मेरा दिल भी जाने 
पर कोशिश है अँधेरे में दिया जलाने का ||



11 टिप्‍पणियां:

  1. वक्त बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है...
    बहुत ही खूबसूरत भाव हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  2. behteen rachna

    kabhi hamare blog par bhi aaye

    www.deepti09sharma.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. रौशनी तले अँधेरा है ये मेरा दिल भी जाने
    पर कोशिश है अँधेरे में दिया जलाने का ||
    रंग लाती कोशिश ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. वक्त-बेवक्त तेरा आना अच्छा लगता है।
    बहुत अच्छा लिखा है।मेरी कविता अच्छा लगता है पढियेगा
    अच्छा लगेगा।मेरे ब्लाग पर आने के लिये धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. पर मरहम भी तो दिल को तेरी याद ही लगाती है ||

    bahut achha laga aapko padhna.

    shubhkamnayen

    उत्तर देंहटाएं

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