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सितंबर 05, 2013

सावन आयो रे.....















बादलों की गर्जना में
नीर भी है पीर भी
कौन से वो आंसू है वो !
खार भी है सार भी।। 

वेदना के अश्रु है या
शबनमी बूंदों का खेल
या धरा पर उतरती है
झर झर झरनों का बेल ॥  

गात,पात,घाट,बाट 
प्लावित तन छलछलात 
विरही हृदय छटपटाये 
प्रणय सुर स्मरण आये ॥ 

सप्तरंग रंग बिखेरे 
सावन संग-संग ले फेरे 
ग्रीष्म-ताप भी भीगे रे  
झूम के सावन आये  रे ॥ 



9 टिप्‍पणियां:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - शिक्षक दिवस पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

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  2. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 07/09/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. नमस्कार आपकी यह रचना आज शुक्रवार (06-09-2013) को निर्झर टाइम्स पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

    उत्तर देंहटाएं

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