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मई 25, 2012

मंजिल ढूँढती हूँ .....





मंजिल  ढूँढती हूँ 
 रास्तों के सफ़र में 
   ये बाज़ार की भीड़ है 
     मंजिल दिखेगी कहाँ ।।

तन्हाई में भी मैं 
 चल  प ड़ती हूँ गर 
  अँधेरी इस दुनिया में 
    रौशनी है कहाँ  ।।

जहां भी जाती हूँ 
 इस  अंध  जग   में 
   परछाईं भी अपनी 
     पराई सी लगे    ।।  

निशाँ ढूँढती हूँ 
 मंजिल   की  मैं 
   रेतीली ज़मीन है 
    मिलेगी   कहाँ   ।।

आँधियों से लड़ने की
 आदत तो हो गयी 
  पर कदम अब भी -
    ढूँढती  है  तेरे निशाँ   ।। 




23 टिप्‍पणियां:

  1. आँधियों से लड़ने की
    आदत तो हो गयी
    पर कदम अब भी -
    ढूँढती है तेरे निशाँ ।।
    श्रेष्ठ कविता.........
    और ये है...............
    सर्वश्रेष्ठ पंक्तियाँ......

    उत्तर देंहटाएं
  2. तन्हाई में भी मैं
    चल प ड़ती हूँ गर
    अँधेरी इस दुनिया में
    रौशनी है कहाँ ।।

    hai raushani.....
    yahin hai....
    bas yahan hi hai raushani.....!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
    चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
    टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
    मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
    शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति.....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. उदासी का गहरा एहसास लिए ... पर इस निराशा में भी आशा की किरण है ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर भाव संयोजन से सजी अनुपम रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने
    कल 30/05/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' एक समय जो गुज़र जाने को है ''

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहद भावपूर्ण...

    आँधियों से लड़ने की
    आदत तो हो गयी
    पर कदम अब भी -
    ढूँढती है तेरे निशाँ ।।

    शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  10. अंबर में उड़ता फिरे, मनवा ये बिन पाँख।
    मंजिल नजरों में रहे, खुली रहे बस आँख॥


    सुंदर रचना....
    सादर।

    उत्तर देंहटाएं
  11. निशाँ ढूँढती हूँ
    मंजिल की मैं
    रेतीली ज़मीन है
    मिलेगी कहाँ,,,,,,लाजबाब पंक्तियाँ ,,,,,,
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन कविता ,,,,,

    समर्थक बन गया हूँ,,आप भी बने तो मुझे खुशी होगी,,,,

    RESENT POST ,,,, फुहार....: प्यार हो गया है ,,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह...सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  13. के बारे में महान पोस्ट "मंजिल ढूँढती हूँ ....."

    उत्तर देंहटाएं

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