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मई 10, 2011

नज़्म



(1)
चाँद खिला पर रौशनी नही आयी
रात बीती पर दिन न चढ़ा
अर्श से फर्श तक के सफ़र में
कमबख्त रौशनी तबाह हो गया
(2)
दिल की हालत कुछ यूं बयान हुई
कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा
राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम
न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला





3 टिप्‍पणियां:

  1. कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता।

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  2. रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाएँ .. बहुत प्यारी रचना है

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज का आगरा ,भारतीय नारी,हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल , ब्लॉग की ख़बरें, और एक्टिवे लाइफ ब्लॉग की तरफ से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

    सवाई सिंह राजपुरोहित आगरा
    आप सब ब्लॉगर भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई / शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं

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