समर्थक

अप्रैल 04, 2014

वसंत न जाना तुम !!


आसमान का रंग हो आज चाहे  फीका 
आज बारिश भी न कर पाये तन को गीला 
फूल चाहे आज खिले अधखिले से 
पर आज तुम मिले 
आज ही वसंत !! 


चाहे मैं बस न पाऊँ तुम्हारी यादों में 
मेरा पूर्ण प्रेम न मिले इतिहासों में 
मेरा तुम्हारा प्रणय है समय से परे 
नयन भर देखा तुम्हे
 आज ही आया वसंत !! 


चाहे दिन हो कितने ही घन से भरा 
चाहे सावन बारिश से भर दे ये धरा 
हाथ पकड़ कर हम तुम यूं ही निकल पड़े 
आज हम नहीं एकाकी 
वसंत है दिन-रात्रि  !!


मेरे स्वप्न को कोई सुने -ना-सुने 
शब्द उसे दूंगी चाहे लय न बंधे 
ह्रदय आक्रान्त हो चाहे कितने ग़मों से
मेरे स्वप्न द्रष्टा हो तुम 
वसंत न जाना तुम !!










ब्लॉग आर्काइव

widgets.amung.us

flagcounter

free counters

FEEDJIT Live Traffic Feed