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हमने रखे हैं नक्शे पा आसमां के ज़मीं पर अब ज़मीं को आसमां बनने में देर न लगेगी टांग आयी हूँ सारे ग़म दरो दीवार के खूंटी पर अब वफ़ाओं...
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कदम से कदम मिलाकर देख लिया आसान नहीं है तेरे साथ चलना तुझे अपनी तलाश है मुझे अपनी मुश्किल है दो मुख़्तलिफ़ का साथ रहना यूँ तो तू दरिया और ...
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ये चीत्कार ! ये हाहाकार ! ये संहार !!! क्यों ? ये संत्रास ! ये परिहास ! सब बदहवास ! क्यों? ये वारदात ! ये मारकाट ! सब बरबाद...

Pyari aur chhoti nazm.
जवाब देंहटाएंबढ़िया रचना!
जवाब देंहटाएंbahut gahri baat....achchi lagi.
जवाब देंहटाएंबढ़िया प्रस्तुति ।
जवाब देंहटाएंबधाई ।।
बहुत सुन्दर वाह!
जवाब देंहटाएंआपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 23-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-851 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ
सुंदर भाव...
जवाब देंहटाएंबहुत खूब
जवाब देंहटाएंकश्ती को ये बात कौन बताये जालिम
जवाब देंहटाएंना दरिया अपनी न किनारा अपना.
बहुत सुंदर गज़ल.