जुलाई 24, 2012

देख रही थी एकटक.....



















देख रही थी एकटक सितारों को 
आसमान पिघलने लगा ,
चाँद की चांदनी पड़ी मद्धिम -
बादल छाने लगा ।।


दूर गगन में तारों की महफ़िल 
एकाएक सजने लगी 
बादल का  ओट  लेकर फिर से 
रौशनी मचलने लगी ।।


देख मचलना तारों का 
इक आस सी जगी 
सुना है टूटता तारा 
करता है मुराद पूरी ।।


थाह नहीं मेरे जज्बातों का 
बादल से शिकायत कर बैठी 
छंट गए बादल खुला आसमान 
रौशनी फिर चढ़ बैठी ।।



जुलाई 09, 2012

धन्य हुई मै


आजन्म संगति की अपेक्षा प्रिये-
गुण--दोषों सहित स्वीकार्य 
हुई हूँ--धन्य हुई मै ,
खींचा है आपके प्रेम ने मुझे 
सींचा है आपने  सपनो को मेरे 
प्रेम की ये परिभाषा 
आपने है सिखाया 
प्रिये ! हमारा अस्तित्व इस 
दुनिया में रहेंगे क़यामत तक 
शपथ है मेरी मै  न जाऊंगी 
रह न पाऊँगी 
देखे बिना आपके एक झलक 
सात जन्मो से बंधी हूँ मै 
आगे सात जन्मो तक 
सात फेरे के बंधन है 
मै न जाऊंगी 
तोड़कर ये बंधन 
प्राण न्योछावर है आप पर 
आपसे ही सीखा है 
प्रेम की परिभाषा 
धन्य हुई मै ।।

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