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मार्च 31, 2012

विचारों का बादल...

विचारों का बादल उमड़ते घुमड़ते आ ही जाते है
शब्द जाल के उधेड़ बुन में जकड़ ही जाते है
व्याकरण की चाशनी में डूब ही जाती है
वर्ण-छंद के लय ताल में पिरो दी जाती है

लेखनी की झुरमुटों से जब निकलता  है
विचार मात्र विचार ही नहीं वांग्मय बन जाता है
कृति ये ज्योत बनकर जगमगाता है
अपने प्रकाश से प्रकाशित कर सब पर छा जाता है

तिस पर उसे गर स्वर में बांधा तो गीत बनता है
सुर का जादू गर चले तो समां बंध जाता है
विचारों को बढ़ने के दो पग मिल जाते है
(इस तरह )सम्पूर्णता को प्राप्त कर वो झिलमिलाते है



मार्च 25, 2012

मेरी पुरानी कविताओं से .......


ऐसे उदास नज़रों से  न देखो
दिल दहल जाएगा
उदास क्यों हो बता दो गर
दिल बहल जाएगा
माथे पर शिकन
आँखों में उदासी
चेहरा बेनूर कर देगा
परेशान क्यों हो
रास्ते कई है
उलझन है सुलझ जाएगा


मित्र,सखा,बंधु
कुछ भी कह लो मुझे
मै हूँ हर पल
साथ तुम्हारे


मानो न मानो
अपना मुझे तुम
इस कठिन घड़ी में हूँ
आस पास तुम्हारे


मार्च 13, 2012

जिंदगीनामा



कई तहों में  ज़िन्दगी सिमटती चली जाती है 
जीवन ये ख़ामोशी से सलवटों में समां जाती है 
कल और आज के बीच का बंटवारा हो न सका 
कई टुकडो में ज़िन्दगी को खुरचती  चली जाती है 


तनहा गुज़र-बसर करना है इक नशा जीवन का 
फंदों के अक्स से खेलना है इक नशा प्रीतम का 
टुकड़ों में बँटी ज़िन्दगी को बुनते चले जाते है 
दरख्तों को आंसुओ से भरते चले जाते है 


मद्धिम सी रौशनी है तारो का जमघट है नहीं अब 
चाँद भी छोड़ चूका साथ ...उषा का स्वागत है अब 
हर रात चाँद और मै..... रिश्ते बुनते जाते है 
ज़िन्दगी के तहों से सलवटे हटाते जाते है 







मार्च 04, 2012

हर पल





हर पल बेहतर था तेरे आने पर 
उम्मीद जग उठी थी तेरे रहने पर 
पर तूने जो जख्म दिया मेरे सीने में
सपने बह गए सारे तेरे जाने पर 


रेत ले गया समंदर मेरे प्यार की 
दफन हो गया एहसास तेरे प्यार की 
ख्वाबो पर अब हक नहीं रहा कोई 
खो दिया मैंने तुम्हे एक बार फिर 


वीरान पड़ी है गली कूचे इस जहां में 
शाम ढल गयी है तेरी याद में  
जाने किस शहर में ढूँढू ठिकाना तेरा 
जी लिया उम्र सारा बेवफा तेरी ख्याल में 


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